“क्योंकि हमारा पल भर का हलका सा क्लेश हमारे लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।” (२ कुरिन्थियों ४:१७)




“क्योंकि हमारा पल भर का हलका सा क्लेश हमारे लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।” (२ कुरिन्थियों ४:१७)

    हरेक काम के लिए दाहिना हाथ अति उपयोगी है। बहुत थोड़े लोग बाँये हाथ का उपयोग करते हैं। इसलिये जब याकूब ने ‘मेरे दहिने हाथ का पुत्र’ अथवा ‘मेरे सामर्थ्य का पुत्र’ ऐसा नाम दिया तब इसका मतलब था कि जिस दुःख में बिन्यामीनने जन्म लिया था उसके द्वारा, अंत में उसे अधिक बल एवं अधिक आनंद प्राप्त होगा। बिन्यामीन की माँ की प्रसूति में ही मृत्यु हो गई थी, इसलिए माँ का प्रेम क्या हैं, इसे वह नहीं जानता था। परन्तु बिन्यामीन के कारण ही, आगे चलकर, युसुफ की कृपा उसके भाइयों पर हुई। उसके भाई युसुफ को तुच्छकारते थे, परन्तु बिन्यामीन को देखते ही युसुफ का मन पिघल गया, और उसने अपने भाइयों को केवल क्षमा ही नहीं कि परन्तु उनको इनाम भी दिया।

    इस रीति से, जो दुःख हमें परमेश्वर के दाहिने हाथ लाता है, उस विषय में बिन्यामीन कह रहा है। दुःख एक कीमती एवं अमूल्य अनुभव है जो हमें परमेश्वर के समीप लाता है और उसके सामर्थ्य का उपयोग करने का आनंद हमको देता हैं। प्रभु हमको अत्यंत भारी दुःख के अनुभव में होकर ले जाता है, छोटी उम्र में हमारे माता पिता को वह उठा ले, हमारे बच्चों को अथवा पति को या पत्नी या अन्य प्रियजनों को वह उठा ले अथवा मित्र विश्वासघात करे तब यह दुःख किस वजह से हमारे ऊपर आ पड़ा है इसे हम जानते नहीं। परन्तु जो दुःख आ पड़ता है उसके द्वारा हम दैवी अनुग्रह पाते हैं।

    हमने अनेक घटनाएँ देखी हैं जिसमें परमेश्वर के सेवकों को छोट़ी उम्र में ही महिमा में बुला लिया गया है। प्रेरितों के काम में हम पढ़ते हैं कि जवानी में स्तिफनुस को पत्थरवाह करके मार डाला गया, तब तरसुस का शाऊल गवाह और सहायक रहा। चमकते हुए चेहरे से स्तिफनुस ने जब कहा, कि ‘हे प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा’ तब जो दृश्य उसने देखा उसे वह कभी भी भूल नहीं सका। आगे चलकर पौलुसने खुद मसीह के खातिर अनेक दुःख उठाए (२ कुरिन्थियों ११:२४-२८)। हम कह सकते हैं कि स्तिफनुस का जयवन्त मृत्यु ही ने पौलुस को प्रभु के खातिर एक दृढ़ गवाह में बदल डाला। जब खुद के ऊपर पत्थरवाह किया गया तब पौलुसने इसे आनंदपूर्वक झेल लिया। इसी प्रकार से उसने कमी घटी, निर्धनता और जहाज टूटने के अनुभवों को भी आनंदपूर्वक झेल लिए। इसी प्रकार से प्रभु के पवित्र लोगों के दुःख सहने और मृत्यु द्वारा प्रभु ने अनेक लोगों को उद्धार एवं अन्य आशिषें दी है।

2 कुरिन्थियों 1:3,4
हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्ति का परमेश्वर है।    4  वह हमारे सब क्लेशों में शान्ति देता है; ताकि हम उस शान्ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्लेश में हों। 

“परन्तु वे चुप रहे और उसके उत्तर में एक बात भी न कही, क्योंकि राजा की ऐसी आज्ञा थी कि उसको उत्तर न देना।” (यशायाह ३६:२१)

    जब हम कठ़िनाई में हों और हमारे उद्धारकर्ता पर हम भरोसा रखते हैं, तब शैतान हमारे समक्ष ऐसी परीक्षा लाता है कि संसार के लोग तेरी ठठ्ठा करेंगे। शायद वे कहेंगे कि ‘अभी तुम तुम्हारे उद्धार के विषय में बात तो करते हो, परन्तु हम देखते हैं कि वह तुम्हारी मदद करता है कि नहीं। दुनिया के लोग जब ठठा करते है तब कई लोग अपना विश्वास और आनंद खो बैठ़ते हैं। परन्तु परमेश्वर के वचन द्वारा हम जानते हैं कि हमको धोखा देने और परीक्षा में डालने के लिए शैतान अवश्य ही बाढ़ की नाई आएगा।’ परन्तु हमारा राजा कहता है कि, ‘उसे उत्तर मत दो।’ यही हमारा हथियार है। शत्रु को पराजित करने के लिए हथियारों की हमको जरूरत नहीं। कई मनुष्य इसी रीति से सांसारिक हथियारों द्वारा शैतान को हराने का प्रयत्न करने से धोखा खा गए हैं (२ कुरिन्थियों १०: ४)। ऐसा करने के बदले प्रभु की उपस्थिति में शांत रहें और उत्तर प्राप्त करें। यहोशू के समय में इस्राएलियोंने यरीहो को किस रीति से जीता उसे स्मरण रखें (यहोशू ६: १-६)। यरीहो की दीवार ऊँची एवं दृढ़ थी। उसे देखकर इस्राएली डरते थे। क्योंकि हथियारों एवं सेना की संख्या को देखते हुए तो दुश्मन उनसे ज्यादा ताकतवर थे। परन्तु परमेश्वर ने उन्हें स्पष्ट बता दिया था कि जो हथियार वह उन्हें देने वाला है उसके द्वारा वह दुश्मनों को जीत सकेगे। उनकों तो सिर्फ परमेश्वर के सुझावों को मानना था और पालन करना था। जब वे प्रभु के आधीन हुए तब दिवार टूटकर गिर पड़ी। भूकम्प के समय मकान एवं दिवार टूटकर गिरते हैं; तब पत्थर अव्यवस्थित रीति से दाएँ बाएँ गिर पड़ते हैं। मुझे याद हैं, क्वेटा में जब भूकम्प हुआ था तब कई मकान एवं दीवालें गिर पड़ी थीं और चारों ओर ऐसे बड़े ढेर हो गए थे कि चलना भी मुश्किल हो गया था। परन्तु पवित्र शास्त्र कहता है उसके अनुसार यरीहो की दीवार सीधी टूटकर गिर पड़ी, जिससे कि लोग आसानी से चलकर अन्दर जा घुसें।

    यहाँ पर प्रभु हमसे कहता है कि, शैतान को हराने के लिए हथियारों का उपयोग न करें घुटनों पर रहते हुए जब आप प्रभु की वाणी सुनेंगे एवं क्या करना है उस विषय में उसकी ओर से सुझावों को प्राप्त करेंगे तब ही रोज-व-रोज आप शैतान को हरा सकेंगे। शत्रु चाहे किसी भी रीति से आपके उपर चढ़ आए, विश्वास से प्रार्थना करते हुए प्रभु से कहें, ‘प्रभु, आपके सामर्थ्य पर एवं आपके विजय पर मैं आधार रखता हूँ। अब प्रभु मुझसे कहें कि मेरा हथियार किस रीति से उपयोग करना है।’ उसके बाद प्रभु किसी न किसी रीति से आपको प्रोत्साहन देने के लिए और सामर्थ्यवान करने के लिए बाइबल के वचनों को देगा और आश्चर्य की बात है कि थोड़े ही वचनों के द्वारा शैतान कैसे हार जाता है।

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